एक कडवी बात...

🙏सादर प्रणाम! 
देवीयों और सज्जनों 
मैं केवल आप जैसा ही आपका गुमनाम मित्र हूं.
एक कडवी बात...अगर जचती है तो ठिक
नहीं तो जाने भी दो यारों...

हमारे कई पंडित मित्र है ,समूह है कि आज भी सच्चे दिल से,कडी मेहनत से इस यंत्र के जरीए से- पारदर्शकता से अनुष्ठान मे है

आजकाल इनके यजमान है-

सभी फौजी, सीमा सुरक्षा जवान,
अन्नदाता हरेक किसान,
संशोधक, वैज्ञानिक,
भारतीय संस्कृती रक्षक ,
संत महंत साधू धर्मरक्षक,
समाज सेवक वा सुधारक सज्जन,
सच्चे सरकारी कर्मचारी,
वकील,डौक्टर, पंडीत, ज्योतिषी,
शिक्षक,छात्र, कलाकार, क्रीडा क्षेत्र से है उनके लिए
माता,बहेन,भाभी नवजात शिशू,
बूढे, बुजुर्ग ,बिमार

स्तोत्र पाठ पठन एवं दैवी मंत्र शक्ती से
( अघोरी, तांत्रिक, या लाल किताब की आधी अधुरी विद्या से बिलकुल ही नही) 
अनुष्ठान कर रहे है , 

-ऊन्हे आपसे धन्यवाद की अपेक्षा नहीं
- धन की लालसा से भी नहीं
- प्रसिद्ध प्रसारण से कोसो दूर
परंतु ये ईनकी ही देन है , अनुष्ठान जैसे अच्छे कर्म की वजह से ही शायद हम लोग बचे है. जिस से हमारे जैसे सदृढ ,समझदार विद्वज्जन अपने रोज के काम आसानी से कर पा रहे है, है ना? मानते हो तो बोलो हां / ना!

या फिर ये कहीं आपकी अपनी खुद की साधना का  असर है? ऐसा जिन्हे लगता है वो शायद किसी वहेम मे है क्योंकी खुद के लिये खुद ने अगर कुछ जप जाप किया तो केवल आत्म शुद्धीकरण ,आत्म शांती, आत्म ज्ञानी बन सकते हो पर दूसरोंको आपका क्या लाभ?

आजकल तो थोडा कुछ अच्छा करो तो इसको प्रदर्शित, प्रकाशित करनेवाले की सारे है
प्रसार माध्यम कंपनी अपनी आन,बान,दर,दाम, भाव के लिये कार्यंरत है, सच झूठ से परें है ये बिचारे..

नेताजी तो बस! क्या कहने?

ऐसे मे इन ब्राह्मण या पंडीत गुरूजीयोंको समाज ने क्या दिया? ताने? मजबूरी समस्या दूर होने के बाद भी दक्षिणा की बात आते ही कछ बहाना? आदर सम्मान देना तो दूर उलटा मंदिर के लूटेरे जैसे आरोप?
कुछ गिने चूने ढोंगी , पाखंडी ,झूठ मूठ के बने हुए ब्राह्मण , वक्त आने पंर दावा करते है  की भगवान ही नहीं है , 
कलीयुग मे तो ये होना ही है
ये महामारी, भूचाल, युद्ध की जड कौन ? 
आस्थिक या नास्तिक?
शाकाहारी या मांसाहारी?
देश,धर्म, शास्त्र, पुराण,गुरू,माता,पिता, सज्जन शक्ती को माननेवाले या ये ना माननेवाले,इन सबकी हमेशा नींदा करनेवाले, हमेशा अपनी जाती को घसीटकर पाप को बढावा देने वाले ये सज्जन शत्रू ?
इसी लिये देवीयों और सज्जनों
साथी हाथ बढाना...
जरूरत है की सच्चे पंडीत गुरूजीयोंको उनके बूरे समय में सहायक बनें , अनुष्ठान जैसे अच्छे कर्म की साधना का असर जानीए , चिंतामुक्त रहीए.

विनम्र आवाहन है की यदि आपको भी कहीं
खुद के लिये भी जाप करना होगा तो  किसी अनुभवी ज्ञाता से दक्षिणा देकर ही अनुभव मिल सकता है चाहें आप पंडीत ज्योतिषी ब्राह्मण ही क्यू न हो!
तब ही फल मिलेगा यकीन मानो!
इसी लिये ये बात कडवी है!ना? लेकीन सच है!

एक शुभचिंतक

श्रीवर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाविधाच्छोभमानं महीयते | धान्यं धनं पशुं बहुपुत्रलाभं शत सवत्सरम दिर्घमायु:

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